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दिसंबर 19, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

उसने सपने यैसे दिखाये, हम करवट बदलते रह गए ||

  उसने सपने यैसे दिखाये, हम करवट बदलते रह गए,  वो देश बदलने आये थे, कपड़े बदलते रह गए || नेता ही नही अभिनेता भी वो कमाल का है,  उसके अभिनय पर हम ताली थाली बजाते रह गए || नित नये प्रपंच में, उलझाये रखा देश को,  जुमलो में यैसे उलझे, मन की बात सुनते रह गए || सुना था हमको भी मिलेगा, जब कालाधन आयेगा,  हम खाते खुलाते रह गए, वो नोट बदलते रह गए || पांच किलो राशन पर, दस किलो भाषण है, व्यापारी रबड़ी खा गए, हम रेवडी खाते रह गए  || पुर्खो की कमाई को, मुर्खो ने बेच दी,  देश कुबेरों पर लुटा, हम आपस मे लडते रह गए || विश्वगुरु हम बने, महगाई, भुखमरी, बेरोजगारी में,  बैड बजा प्रजा का, वो डंका बजते रह गए || झूठ पाखंड आडंबर में खलिहर भक्त चकाचौंध है,  हिन्दुत्व राष्ट्रवाद की दुकान पर वो पकौड़े तलते रह गए || आपदा थी नोट और तालाबंदी, नागरिक्ता और कृषि कानून,  उनके दस्त को भी दल्ले मास्टर स्ट्रोक बताते रह गए || डायन महामारी में, लाखों मरे लाचारी में,  वो महल बनवाते रहे, हम सांसो को तरसते रह गए || बिलख रही है बिलकिस निर्भया भयभीत है,  सनातनी, बलात्कार...